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Talk to Salesआज, हमारे बदलते विकास नमूने में एक अन्य महत्वपूर्ण कारक भी दिखाई देता है। नया नारा हकदारी के माध्यम से सशक्तीकरण है जिसे कानून का सहारा प्राप्त हो। हमने अपनी विकास प्रक्रिया के लिए अधिकार आधारित दृष्टिकोण अपनाया है। शिक्षा, रोजगार और खाद्य सुरक्षा का अधिकार इस विकास कार्यनीति का आधार है। मैं कामना करता हूं कि यह विकास कार्यनीति पूर्णतः कार्यान्वित हो।
हमारे उपेक्षित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए, हमने उन्हें रोजगार और शिक्षा का अधिकार दिया है। हमने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 जैसे कानून लागू किए। लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने का कानून लागू करने की प्रक्रिया भी पूरी होने वाली है।
‘आधार’ परियोजना प्रत्येक निवासी को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करेगी। इससे हमारे, विशेषकर गरीब और जरूरतमंद, नागरिकों को आसानी से अनेक लाभ और सेवाएं अधिक कुशलता के साथ मिलेंगी। जनवरी, 2013 में आरंभ की गई ‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’ योजना में आधार प्रणाली के सहयोग से अधिक पारदर्शिता आएगी तथा लेन-देन लागत में कमी होगी।
देवियो और सज्जनो, हमारी वितरण प्रणालियों को दुरुस्त करना होगा और केवल सुशासन से इस समस्या का हल हो सकता है। यदि गरीब व्यक्ति के लिए लाभ तक उसकी पूरी पहुंच नहीं हो रही है तो इसके दो प्रमुख कारण भ्रष्टाचार और अक्षमता हैं।
भ्रष्टाचार हमारे देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने के लिए खतरा है। यह सभी नागरिकों में समानता पैदा करने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि हाल ही में शासन में और अधिक पारदर्शिता लाने की हमारी प्रतिबद्धता को दृढ़ करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। उठाए गए कुछ कदमों में 2011 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र समझौते की पुष्टि, 2010 से वित्तीय कार्रवाई कार्यबल की सदस्यता, विदेशी लोक अधिकारियों तथा अंतरराष्ट्रीय लोक संगठनों के अधिकारियों की रिश्वत खोरी निवारण बिल 2011 की शुरुआत तथा भारतीय दंड संहिता में संशोधन द्वारा निजी क्षेत्र में घूसखोरी को दांडिक अपराध बनाने के प्रस्ताव संबंधी पहलें शामिल हैं।
खराब शासन के मूल में, चाहे वह योजना का कार्यान्वयन या मूल्यों का अनुपालन हो, बदलाव के प्रति हमारी सुस्ती है। मुझे आपको यह याद नहीं दिलाना होगा कि किस प्रकार एक परिश्रमी राष्ट्र की प्रतीक एक युवती की गत वर्ष दिसंबर में भारत में एक क्रूर हमले में जान चले जाने से राष्ट्र कितना आहत हुआ था। जो मैं पहले भी कर चुका हूं, उसे मैं दोहराता चाहूंगा और मेरा मानना है कि अपनी नैतिक दिशा को फिर से निर्धारित करने का यही समय है।