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1 पत्रुस 4:11-5:2

11 जे केओ उपदेश दैत छथि, से एना देथि जेना परमेश्वरक बात सभ बाजि रहल छथि। जे दोसराक सहायता करैत छथि, से ओहि बल सँ करथि जे परमेश्वर दैत छथि, जाहि सँ सभ बात मे यीशु मसीहक माध्यम सँ परमेश्वरक स्तुति होनि। महिमा आ सामर्थ्य युगानुयुग परमेश्वरक छनि। आमीन।

मसीहक दुःख-भोग मे सहभागी भेनाइ आनन्दक बात

12 प्रिय भाइ लोकनि, अपन अग्नि-परीक्षा पर, जे अहाँ सभ कँ जँचबाक लेल भऽ रहल अछि, आश्चर्य नहि मानू, जेना कोनो असाधारण बात भऽ रहल होअय। 13 बल्कि आनन्द मनाउ जे अहाँ सभ मसीहक दुःख-भोग मे सहभागी छी। तरखन जाहि दिन मसीह अपना महिमा मे फेर औताह, ताहि दिन अहाँ सभ आओर आनन्दित होयब। 14 जँ अहाँ सभक अपमान एहि लेल कयल जाइत अछि जे अहाँ सभ मसीहक लोक छी, तँ ई अहाँ सभक लेल सौभाग्यक बात अछि, किएक तँ एहि सँ स्पष्ट होइत अछि जे महिमाक आत्मा, जे परमेश्वरक आत्मा छथि, से अहाँ सभ मे वास करैत छथि। 15 एना नहि होअय जे अहाँ सभ मे सँ कोनो व्यक्ति हत्यारा, चोर वा आओर कोनो तरहक अपराधी बनि कऽ, वा दोसराक काज मे टाँग अड़यबाक कारणें दुःख भोगय। 16 मुदा जँ केओ मसीही होयबाक कारणें दुःख उठबैत छी तँ लज्जित नहि होउ, बल्कि परमेश्वरक स्तुति करू जे मसीहक लोकक रूप मे परिचित छी।

17 किएक तँ न्यायक समय आबि गेल अछि आ से परमेश्वरक परिवारे सँ शुरू भऽ रहल अछि। जँ न्यायक शुरूआत अपना सभ सँ भऽ रहल अछि, तँ तकरा सभ केँ की होयतैक जे सभ अनाज्ञाकारी भऽ परमेश्वरक शुभ समाचार केँ नहि मानैत अछि? 18 जेना लिखल अछि,

“जँ धार्मिक लोक सभ मुश्किल सँ उद्धार प्राप्त करत,
तँ अधर्मी आ पापी मनुष्य सभक दशा की होयतैक?”*

19 एहि लेल जे सभ परमेश्वरक इच्छाक अनुसार दुःख उठा रहल छथि, से सभ अपना केँ विश्वासयोग्य सृष्टिकर्ताक हाथ मे सौपि देथि आ उचित काज करैत रहथि।

मसीहक मण्डलीक देख-रेख कयनिहार आ जबान भाइ सभ सँ अनुरोध

5 अहाँ सभ मे जे मण्डलीक देख-रेख कयनिहार सभ छी, अहाँ सभ सँ हमर एकटा अनुरोध अछि। हमहूँ मण्डलीक एकटा देख-रेख कयनिहार छी, मसीहक कष्टभोगक गवाह छी आ भविष्य मे प्रगट होमऽ वला जे महिमा अछि, ताहि मे हमहूँ अहीं सभ जकाँ सहभागी रहब। 2 अहाँ सभ सँ हमर अनुरोध ई अछि जे, अहाँ सभक जिम्मा मे जे परमेश्वरक भेंड़ा रूपी झुण्ड अछि, तकर अहाँ सभ चरबाह जकाँ रखबारी करू। ओकर देखभाल करू, कोनो दबाब सँ नहि, बल्कि जहिना परमेश्वर चाहैत छथि, तहिना आनन्द सँ करू, और अनुचित लाभक दृष्टि सँ नहि करू,

4:18 नीति 11.31

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