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Hot flashes के लिए अन्य उपचार भी उपलब्ध हैं। साधारणतया यह लक्षण 3 से 5 वर्ष तक रहते हैं और उपचार की आवश्यकता भी लगभग इतने समय के लिए ही रहती हैं।

पौधों में इस्ट्रोजन हार्मोन पाया जाता हैं जिसे 'फाइटोइस्ट्रोजन' कहा जाता हैं तथा ये तिल, सोया, चना, लहसुन, मूंग (अंकुरित), खजूर, बादाम, मूंगफली इत्यादि में पाया जाता हैं हालांकि यह मानव शरीर में बनने वाले 'इस्ट्रोजन' जितना प्रभावी नहीं होता हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डी रोग)

इसका अर्थ हैं हड्डियों का छेददार हो जाना। यह अस्थि-उत्तकों के पतले होने के कारण होता हैं जिसके फलस्वरूप हड्डी का घनत्व कम हो जाता हैं। हड्डियों के निर्माण में कैल्सियम और फॉस्फेट महत्वपूर्ण खनिज होते हैं। रजोनिवृति के पश्चात इस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता हैं, साथ ही कम कैल्सियम के कारण हड्डियों कमजोर होने लगती हैं और 'ऑस्टियोपोरोसिस' की शुरुआत हो जाती हैं।

इस में हड्डियां छेददार, झिरझिरी और छोटी हो जाती हैं। हालांकि इसमें स्त्रियों को किसी प्रकार के दर्द का अनुभव नहीं होता हैं, इसलिए इसे Silent disease (मूक-बीमारी) कहा जाता हैं। एक्स-रे द्वारा भी इसका पता लगाया जा सकता हैं। उच्चस्तरीय टेस्ट जैसे - : अल्ट्रासाउण्ड एवं डेंसिटोमैट्री द्वारा इसका समय रहते पता लगाना संभव हैं ताकि बचाव के उपाय सही समय पर किया जा सके। इस रोग का पता तब लगता हैं जब हड्डियों में दरारे (फ्रैक्चर) होने लग जाते हैं जो आमतौर पर रीढ़ की हड्डी, पसली, कूल्हे की हड्डी और कलाई में होते हैं। रीढ़ की हड्डी में एक से अधिक फ्रैक्चर होने के कारण दर्द, शरीर का झुकना और चलने- फिरने में तकलीफ होने की संभावना रहती हैं। यदि रीढ़ की हड्डी में बहुत से फ्रैक्चर होते हैं तो ऐसी स्थिति में पीड़ित की लंबाई भी कम हो जाती हैं। इसके कारण पीठ में दर्द, सांस में तकलीफ और पाचन में समस्याएं इत्यादि संभव हैं। 35 वर्ष की आयु के पश्चात नियमित व्यायाम करने से इस बीमारी से बचा जा सकता हैं। कैल्शियम युक्त भोजन व हरी पत्तेदार सब्जियों के सेवन से भी ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव होता हैं। चाय कॉफी के अत्यधिक सेवन से शरीर से कैल्शियम निकल जाता हैं अतः चाय कॉफी का सेवन कम से कम करना चाहिए।

कमर दर्द

40 वर्ष और अधिक आयु की स्त्रियों में कमर दर्द की आशंका होती हैं। कमर के हिस्से की मॉस पेशियों में चोट और खिंचाव के कारण कमर दर्द होता हैं, खिंचाव से कमर की मांसपेशियों और उत्तकों में छोटी-छोटी दरारें हो जाती हैं। जिसके परिणाम स्वरूप कमर में दर्द शुरू होता हैं। इसका उपचार दर्द निवारक दवाओं से, गर्म सेक, आराम और मालिश से संभव हैं। कमर दर्द का दूसरा कारण हड्डियों से रीढ़ की नसे दबने से भी संभव हैं।

घुटनों का दर्द

इसके मुख्य कारण हैं -: घुटनों के जोड़ों में सूजन, मांसपेशियों में चोट, घुटने के लिगामेंट में चोट, और घुटनों के जोड़ की हड्डी का घिसना। इसे ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं। यह स्थिति रजोनिवृत्ति के कारण नहीं होती। यह एक भ्रांति हैं कि गर्भाशय के ऑपरेशन के बाद ऐसे दर्द या तकलीफ होती हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस का उपचार व्यायाम और दवाओं से संभव हैं।

कैल्शियम पूरकता की आवश्यकता

इस्ट्रोजन का हड्डी निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान होता हैं। इससे हड्डी में खनिज कैल्सियम सम्मिलित होता हैं। इस्ट्रोजन की कमी के दौरान महिलाओं को अधिक कैल्शिय-युक्त खानपान करना चाहिए जिससे उनकी हड्डियों को सुरक्षा मिल सके। 50 वर्ष की उम्र के बाद एक महिला को प्रतिदिन 1200 से 1500 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती हैं। इतना कैल्शियम एक औसत भारतीय